आजमगढ़: महंगे मैरेज हॉल की लूट से मिलेगी मुक्ति! भोगइचा में ग्रामीणों ने खुद शुरू किया धर्मशाला का निर्माण, गूंजे मंत्र


आजमगढ़ (अहिरौला): जिले के अहिरौला ब्लॉक अंतर्गत भोगइचा गांव से आत्मनिर्भरता और एकता की एक शानदार तस्वीर सामने आई है। शादी-ब्याह और मांगलिक कार्यक्रमों के लिए अब ग्रामीणों को शहरों के महंगे मैरेज हॉलों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और न ही अपनी गाढ़ी कमाई का मोटा हिस्सा वहां लुटाना पड़ेगा। सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को नवरात्रि के पावन समापन अवसर पर भोगइचा गांव के ग्रामीणों ने मिलकर एक ऐतिहासिक पहल की है।

ग्रामीणों के साझा सहयोग से गांव के प्रतिष्ठित ब्रह्म बाबा स्थान पर एक भव्य धर्मशाला और पेयजल व्यवस्था के निर्माण के लिए भूमिपूजन संपन्न हुआ। इस पूरे अभियान का नेतृत्व कर रहे महेंद्र पांडेय की मौजूदगी में सैकड़ों ग्रामीणों ने संकल्प लिया कि वे सामूहिक प्रयासों से इस धर्मशाला को खड़ा करेंगे। धार्मिक विधि-विधान के साथ आचार्य भानुप्रताप पांडेय ने मंत्रोच्चार के बीच भूमिपूजन कराया, जबकि महंत जगन्नाथ मिश्रा ने अपनी धर्मपत्नी के साथ मुख्य यजमान के रूप में पूजा संपन्न की।

ग्रामीणों को कैसे होगा फायदा?
गांव के ही कमलेश पांडेय और अन्य स्थानीय लोगों का मानना है कि इस धर्मशाला के बन जाने से न केवल पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में सुविधा होगी, बल्कि सबसे बड़ी राहत आर्थिक मोर्चे पर मिलेगी। अक्सर मध्यम और गरीब परिवारों को मांगलिक कार्यों के लिए महंगे मैरेज हॉल बुक करने पड़ते हैं, जिससे उन पर कर्ज का बोझ बढ़ जाता है। यह धर्मशाला भविष्य में ऐसे आयोजनों के लिए एक सस्ता और सुलभ विकल्प बनेगी।

इस नेक पहल की सराहना करते हुए मतलूबपुर के ग्राम प्रधान सच्चिदानंद मोदनवाल ने महेंद्र पांडेय के प्रयासों को सराहा और क्षेत्र के अन्य लोगों से भी इस निर्माण कार्य में बढ़-चढ़कर श्रमदान और सहयोग करने की अपील की। कार्यक्रम के दौरान गांव की एकता देखते ही बन रही थी।

भूमिपूजन के इस अवसर पर मुख्य रूप से महेंद्र पांडेय, मंगला पांडेय, गंगा पांडेय, श्यामनरायन पांडेय, दुर्गा पांडेय, रामदयाल, प्रमोद, विनोद, सरजू, संतोष, अवनीश, नरेन्द्र, शिवप्रसाद, गुड्डू, शैलेन्द्र, अवधेश, सचिन, मदनमोहन पांडेय सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

आजमगढ़ टाइम्स की राय: भोगइचा गांव के लोगों ने दिखा दिया है कि अगर गांव के लोग एकजुट हों, तो वे अपनी समस्याओं का समाधान खुद कर सकते हैं। क्या आपको लगता है कि हर गांव में इस तरह की सामुदायिक धर्मशाला होनी चाहिए ताकि महंगे मैरेज हॉलों की मनमानी पर लगाम लग सके? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर दें।

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