आजमगढ़। जनपद के मिर्जापुर ब्लॉक अंतर्गत ऐतिहासिक दुर्वासा धाम स्थित तमसा-मंजूषा संगम पर दुर्गा प्रतिमा विसर्जन को लेकर इस बार प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पवित्र संगम के जल को प्रदूषण मुक्त रखने के उद्देश्य से प्रशासन ने नदी में सीधे प्रतिमा विसर्जन पर रोक लगाते हुए तट के समीप जेसीबी के जरिए बड़े कृत्रिम गड्ढे खुदवाए हैं, जिन्हें ट्यूबवेल के जरिए पानी से भरा जा रहा है।
दुर्वासा धाम का यह संगम स्थल आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहाँ नवरात्रि के समापन पर कई थाना क्षेत्रों की दुर्गा प्रतिमाएं विसर्जन के लिए लाई जाती हैं। इसी संवेदनशीलता को देखते हुए सुबह से ही निजामाबाद के उप जिलाधिकारी (एसडीएम), तहसीलदार, फूलपुर के क्षेत्राधिकारी (सीओ) और स्थानीय कोतवाल भारी पुलिस बल के साथ मौके पर डटे रहे। प्रशासनिक अधिकारी विभिन्न दुर्गा पूजा समितियों से संवाद स्थापित कर उन्हें संगम की मुख्य धारा के बजाय इन बनाए गए कृत्रिम तालाबों में ही विधि-विधान से प्रतिमा विसर्जित करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
प्रशासन की इस पर्यावरण हितैषी पहल को स्थानीय संभ्रांत नागरिकों और पूजा समितियों का भी भरपूर समर्थन मिल रहा है। व्यवस्था को सुचारु रूप से संचालित कराने में दुर्वासा के पूर्व प्रधान राम कवल तिवारी, पूर्व प्रधान ओम प्रकाश यादव, ऋषि दुर्वासा गोस्वामी समिति के अध्यक्ष प्रेमचंद गिरी, युवा समिति के अध्यक्ष पवन गिरी और ऋषि दुर्वासा दत्तात्रेय चंद्रमा ऋषि विकास समिति के व्यवस्थापक बलराम तिवारी सहित कई स्थानीय लोग सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं।
पाठकों से सवाल: नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए प्रशासन द्वारा कृत्रिम कुंडों में प्रतिमा विसर्जन कराने के इस फैसले को आप कितना सही मानते हैं? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।


