आजमगढ़। शहर के ऐतिहासिक स्थल पुरानी कोतवाली के प्रांगण में आयोजित श्रीरामलीला मंचन के दौरान उस वक्त भक्ति का असीम प्रवाह बह निकला, जब ‘लंका दहन’ और ‘रामेश्वरम स्थापना’ के अलौकिक प्रसंग मंच पर उतारे गए। मंचन के दौरान पूरा पंडाल ‘जय श्रीराम’ और ‘हर-हर महादेव’ के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा और दर्शक भावविभोर हो गए।
इस अद्भुत प्रस्तुति को श्री आदर्श रामलीला मंडल, जनकपुर (सीतामढ़ी, बिहार) से आए कुशल कलाकारों ने अपने जीवंत अभिनय से अमर बना दिया। कथा के अनुसार, माता सीता की खोज में लंका पहुंचे हनुमान जी द्वारा अशोक वाटिका में फल खाने और वाटिका उजाड़ने के प्रसंग को बेहद प्रभावी ढंग से दिखाया गया। इसके बाद मेघनाद द्वारा हनुमान जी को बंदी बनाकर रावण के दरबार में पेश करने और रावण के आदेश पर उनकी पूंछ में आग लगाए जाने का मंचन हुआ। हनुमान जी ने अपनी जलती पूंछ से देखते ही देखते अहंकार में डूबी सोने की लंका को राख के ढेर में बदल दिया।
लंका दहन के पश्चात ‘रामेश्वरम स्थापना’ और ‘सेतु निर्माण’ का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। कथा के क्रम में दिखाया गया कि जब मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने समुद्र से लंका जाने के लिए मार्ग मांगा और लगातार तीन दिनों तक कोई रास्ता नहीं मिला, तब उन्होंने अपना धनुष उठाया। श्रीराम के तेज से भयभीत होकर सागर प्रकट हुए और उन्होंने नल-नील के माध्यम से समुद्र पर सेतु बनाने का उपाय बताया। सेतु निर्माण का कार्य शुरू करने से पूर्व भगवान श्रीराम ने समुद्र तट पर देवाधिदेव महादेव की स्थापना की, जिसे देखकर उपस्थित जनसमुदाय झूम उठा।
आजमगढ़ में चल रही इस पारंपरिक और ऐतिहासिक रामलीला को देखने के लिए क्षेत्र के श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देर रात तक डटी रही। कला और भक्ति के इस समागम ने पूरे इलाके को अध्यात्म के रंग में रंग दिया है।
आजमगढ़ की जनता से सवाल: क्या आपने इस बार पुरानी कोतवाली की रामलीला का मंचन देखा? कलाकारों की इस भव्य प्रस्तुति को आप 10 में से कितने अंक देंगे? अपनी राय कमेंट करके जरूर बताएं!


