आजमगढ़: कुदरत के कहर और ‘अर्नब’ तूफान की चुनौतियों को पीछे छोड़ते हुए आखिरकार कोइलसा के बूढ़नपुर बाजार में रौनक लौट आई है। आजमगढ़ के इस इलाके का सुप्रसिद्ध वार्षिक मेला, जो अपनी परंपरा के अनुसार 30 अक्टूबर को लगना था, इस बार चक्रवाती तूफान के चलते दो दिन की देरी से आज यानी 1 नवंबर को सजाया गया।
आजमगढ़ टाइम्स की टीम जब ग्राउंड जीरो पर पहुँची, तो कोइलसा के बूढ़नपुर बाजार की मुख्य सड़क पर मेले का अद्भुत नजारा देखने को मिला। दोपहर से शुरू हुए इस मेले में शाम 5 बजे तक भारी भीड़ जुट चुकी थी। आयोजकों के अनुसार, तूफान के कारण जो मायूसी छाई थी, वह अब उल्लास में बदल गई है। प्रशासन और आयोजकों ने सुनिश्चित किया है कि यह आयोजन आज रात 10 बजे तक पूरी भव्यता के साथ चलेगा।
मेले के आयोजन स्थल को लेकर अक्सर ट्रैफिक की चिंता रहती है, लेकिन इस बार व्यवस्था चाक-चौबंद दिखी। हालांकि मेला मुख्य सड़क पर ही लगा है, लेकिन स्थानीय लोगों और राहगीरों के आवागमन में कोई बड़ी रुकावट पैदा नहीं होने दी गई। ‘अर्नब’ तूफान के कारण हुई देरी के बावजूद व्यापारियों और दुकानदारों के चेहरों पर चमक साफ देखी जा सकती है।
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि यह मेला कोइलसा की सांस्कृतिक पहचान है और तूफान जैसी प्राकृतिक बाधाएं भी यहाँ के लोगों के उत्साह को कम नहीं कर सकीं। शाम ढलते ही रंग-बिरंगी लाइटों और स्टालों से पूरा बाजार गुलजार हो उठा है।
आपकी राय: क्या आप भी इस बार कोइलसा के बूढ़नपुर मेले में जा रहे हैं? मेले की कौन सी मिठाई या झूला आपको सबसे ज्यादा पसंद है? नीचे कमेंट बॉक्स में अपनी राय और अनुभव जरूर साझा करें।
