आजमगढ़: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में सरकारी तंत्र की सुस्ती और भू-राजस्व विभाग की कथित लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। कलेक्ट्रेट परिसर में आज उस समय गहमागहमी बढ़ गई जब मेहनगर तहसील के दर्जनों वनवासी परिवारों ने अपनी जमीन पर कब्जे की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। इन परिवारों का सीधा आरोप है कि उन्हें कागजों में तो जमीन का मालिक बना दिया गया है, लेकिन हकीकत में वे आज भी अपनी ही जमीन के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं।
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उचहुवां (मेहनगर) निवासी विजय वनवासी दामा को साल 2019 में ही सरकारी जमीन का पट्टा आवंटित किया गया था। आरोप है कि करीब 5 साल का लंबा वक्त बीत जाने के बावजूद उन्हें जमीन का भौतिक कब्जा नहीं दिलाया गया। वनवासी वॉलंटियर बलदेव वनवासी और विजय ने मीडिया को बताया कि इस बाबत उन्होंने मेहनगर के उपजिलाधिकारी (SDM) कार्यालय के भी चक्कर काटे, लेकिन वहां से उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला, समाधान नहीं।
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि यह समस्या सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। मेहनगर तहसील की विभिन्न वनवासी और मुसहर बस्तियों में ऐसे कई परिवार हैं, जिनके पास पट्टा तो मौजूद है, लेकिन जमीन पर कब्जा न होने के कारण वे अपने सपनों का घर नहीं बना पा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की इस ढिलाई के कारण पात्र परिवार सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित रह जाते हैं।
जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में मांग की गई है कि पट्टा पाने वाले सभी पात्र परिवारों की जमीन का मौके पर जाकर तत्काल सत्यापन कराया जाए और उन्हें पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में कब्जा दिलाया जाए। ज्ञापन सौंपने वालों में मुख्य रूप से विजय वनवासी, बलदेव वनवासी, राजकुमार, राम अवध, सुनील, निर्वाता और विमाली समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल रहे। मामले को संज्ञान में लेते हुए जिलाधिकारी ने त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
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